• आप माइग्रेनसे परेशान हैं? तो इसको जरूर देखें !

    माइग्रेन आपका पुराना सिर दर्द भी हो सकता है और इसे बोल चाल की भाषा में आधासीसी और अधकपाटी भी हम कह देते है और माइग्रेन होने के पीछे एक नहीं कई तरह के कारण हो सकते है जिसमे कुछ मुख्य है – अच्छी नींद नहीं लेना , जरुरत से अधिक नकारात्मक तनाव , हारमोन्स का संतुलित नहीं होना आदि मुख्य है जिसमे तनाव को तो आप तनाव के जरिये कम कर सकते है और नींद को बेहतर करने के साथ साथ आप अपने जीवन शैली को भी बेहतर कर सकते है इसके साथ ही अगर आपको किसी खास तरह की कोई एलर्जी है ,अनीमिया यानि खून की कमी है तो भी आपको माइग्रेन की शिकायत हो सकती है और साथ ही यह जानना भी जरुरी है कि अगर पूरे आंकड़ो पर गौर करें तो पुरुषो की अपेक्षा महिलाओं के लिए इसकी होने के ज्यादा सम्भावना है और दुनिया भर में लगभग पांच प्रतिशत पुरुष और पच्चीस फीसदी महिलाएं माइग्रेन से परेशान हैं! आधे सिर में दर्द होता है जो आपके पूरे सिर में भी हो सकता है और धीमा धीमा लगातार बना रहता है | सिर दर्द के साथ साथ चक्कर भी आते है | महिलाओं में अकसर कमजोरी की और अधिक तनाव की वजह से ऐसा होता है | हाथो और पैरो में सूनापन होना | खून के संचार में समस्या के चलते भी इसका सामना करना पड़ता है | रौशनी और तेज आवाज से परेशानी होना | तेज सिर दर्द के साथ साथ उलटी की समस्या होना | गैस होना जो कि कब्ज की वजह से होती है | ये कुछ मुख्य लछण और ऐसे में आपको अपने ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता के कम होने की समस्या का भी सामना करना पड़ता है | सफल और पूर्णतया समाधान के लिए आज ही संपर्क करें प्रसिद्ध होम्योपैथ चिकित्सक डा़ हेमंत श्रीवास्तव से

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  • किडनी या गुर्दे की बीमारी

    किडनी या गुर्दे की बीमारी को ‘साइलेन्ट किलर’ भी कहा जाता है। क्योंकि प्रथम अवस्था में कभी भी इसका पता नहीं चलता है।किडनी शरीर का एक ऐसा अंग होता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को छानकर मूत्र के रूप में निकालने में मदद करता है। इसमें खराबी मतलब पूरे शरीर के कार्य में बाधा उत्पन्न होना,  इसलिए किडनी को स्वस्थ रखना बहुत ज़रूरी होता है। लेकिन आज के आधुनिक युग की जीवनशैली के कारण किडनी की बीमारी होने का खतरा बढ़ गया है। इससे बचने के लिए सबसे पहले ज़रूरी है किडनी के शुरूआती लक्षणों के बारे में जानना- मूत्र की मात्रा या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती हैमूत्र का रंग गाढ़ा हो जाता हैबार-बार मूत्र होने का एहसास होता है मगर करने पर नहीं होता हैरात को मूत्र की मात्रा या तो कम हो जाती है या कममूत्र का त्याग करने के वक्त दर्द होनामूत्र में रक्त का आनाझाग (foam) जैसा मूत्रपैर, हाथ और चेहरे में सूजन  आदि । यह तो किडनी के बीमारी के आम लक्षण हैं जिसका थोड़ा भी एहसास होने पर तुरन्त इसकी जाँच करवायें। और चिकित्सक के सलाह के अनुसार इलाज करना शुरू करें नहीं तो समय के साथ स्थिति खराब होती जाती है। डॉ. हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि किडनी की बीमारी का इलाज करने के लिए होम्योपैथी में दवाओं का भंडार है। बस जरूरत है इसके नियमित रूप से सेवन करने की आवश्यकता है! होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में गुर्दे के लिए कई प्रभावशाली दवाएं उपलब्ध  हैं जो गुर्दे की हो रही क्षति को स्थिर कर सकती हैं तथा  गुर्दे की कार्य क्षमता भी बढ़ा  सकती हैं  जबकि अन्य चिकित्सा पद्धतियों में रोगी को जो भी दवाएं दी जाती है उसमे कुछ न कुछ विषाक्तता होती है जिसे गुर्दे को ही छानकर शरीर से बाहर निकलना होता है परन्तु स्वम गुर्दे के रोग ग्रस्त होने पर यह उसपर एक अवांछित बोझ है !     होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में गुर्दे के इलाज  के लिए दी जाने वाली औषधियों में दवा की मात्रा अत्याधिक सूक्ष्म होती है अतः गुर्दे को कोई क्षति नहीं पहुचती ! किसी होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श कर चिकित्सा ली जाये तथा चिकित्सक के निर्देशानुसार खान-पान में परहेज किया जाये तो तो इस रोग में आशातीत परिणाम मिल सकता है !रोगी डायलिसिस एवं गुर्दा प्रत्यारोपण जैसी पीड़ादायक स्थिति से बच सकता है ! सफल और पूर्णतया समाधान के लिए आज ही संपर्क करें प्रसिद्ध होम्योपैथ चिकित्सक डा़ हेमंत श्रीवास्तव से!

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  • Impotency and homeopathy treatment.

    impotence, also called erectile dysfunction, in general, the inability of a man to achieve or maintain penile erection and hence the inability to participate fully in sexual intercourse. In its broadest sense the term impotence refers to the inability to become sexually aroused; in this sense it can apply to women as well as to men. It may have either physical or psychological causes. Alcoholism, endocrine disease, and neurological disorders are typical physical causes. Psychological causes include anxiety over performance, hostility or other negative feelings toward the sexual partner, and stress, anxiety, depression, or other emotional conflicts outside of the relationship. Homeopathic sexual wellness medicines are well known for their beneficial effect in the sexual sphere treating concomitant factors like anxiety, depression and fatigue

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  • बाढ़ में होनी वाली बीमारियां, व उनके उपाय.

    बाढ़ में होनी वाली बीमारियां बैक्टीरिया की वजह से होने वाली बीमारी हैजा ,बाढ़ के दौरान फैलने वाली सबसे घातक बीमारी होती है। इसके कारण उल्टी-दस्त और निर्जलीकरण हो जाता है। कई गम्भीर मामलों में तो लोगों की मौत तक हो जाती है। दरअसल हैजा एक खास तरह के बैक्टीरिया के कारण फैलता है। यह मुंह और मलमार्ग के माध्यम से ज़ोर पकड़ता है। इससे प्रभावित लोगों के मल में बड़ी संख्या में इस बीमारी के जीवाणु पाए जाते हैं। इस मल के बाढ़ के पानी में मिल जाने की स्थिति में इसके कारण बड़े पैमाने पर संक्रमण फैल जाता है और बहुत तेजी से लोग हैजा के शिकार होने लगते हैं। बाढ़ के समय में शरणस्थल के शिविरों में पहले ही साफ-सफाई की कमी होती है, जिससे तीव्र संक्रमणशील यह बीमारी जल्दी ही महामारी का रूप ले लेती है। स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या ग्रामींढ़ ऐरिया में अधिकतर मामलों में देखा जाता है कि बाढ़ के दौरान लोगों को तटबन्ध व शरणस्थलों पर पलायन करना पड़ता है, जिनमें लोगों को अपने मवेशियों के साथ रहना पड़ता है। स्वास्थ्य और सफाई सम्बन्धी समुचित सुविधाओं के अभाव में ग्रामवासियों को अमानवीय दशा में तब तक रहने को मजबूर होना पड़ता जब तक बाढ़ रहती है। इसके अलावा लोगों के अनुसार उन्हें सबसे गम्भीर समस्या का सामना करना पड़ता है और वह होती है सुरक्षित और साफ पेयजल। हैण्डपम्प और पानी की पाइप लाइनें पीने के पानी के मुख्य स्रोत होते हैं। बाढ़ की स्थिति में ज्यादातर मौजूदा हैण्डपम्प पानी में डूब जाते हैं या फिर गंदगी जमने की वजह से उनका पानी पीने लायक नहीं रहता है । ऐसे में तटबन्धों पर पानी से घिरी अवस्था में भारी संख्या में लोगों को इकट्ठा रहना पड़ता है जिसके कारण उन्हें हैण्डपम्प का पानी भी मिलना दूभर हो जाता है। बाढ़ के कारण निम्नलिखित बीमारियों के फैलने की आशंका होती है - . जलजनित बीमारियां जैसे- मियादी बुखार, हैजा और हेपटाइटिस-ए। . मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियाँ जैसे- मलेरिया, डेंगू और डेंगू सहित हेमरहेजिक बुखार, पीतज्वर और वेस्ट नाइल फीवर। बचाव के उपाय बाढ़ के पानी के साथ सीधे संपर्क में न आने की पूरी कोशिश करें, तथा कभी भी इसका सेवन न करें। आमतौर पर, नलके का पानी बाढ़ से अप्रभावित होता है और पीने के लिए सुरक्षित होता है।अगर आपको पानी में जाना ही पड़े तो रबड़ के जूते और या वाटर प्रूफ दस्ताने पहनें।नियमित रूप से अपने हाथों को धोएं, विशेष रूप से खाने से पहले। अगर पानी उपलब्ध नहीं है तो हेंड सेनेटाइज़र या वेट वाइप का प्रयोग करें।बाढ़ के पानी के संपर्क में आए भोजन का सेवन कभी न करें।

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  • नशा छुड़ाने का होम्योपैथिक उपचार

    किसी मादक पदार्थ (प्राकृतिक अथवा कृत्रिम) का नियतकालीन एवं दीर्घस्थायी सेवन जो कि किसी व्यक्ति विशेष अथवा समाज के लिए घातक हो, अवरोधक हो, उसे ही नशाखोरी कहना समीचीन है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की 1957 में प्रकाशित रिपोर्ट में पारिभाषित किया गया है। इसके मुख्य लक्षण हैं – (1) मादक पदार्थ को लेने की प्रबल इच्छा और इसे प्राप्त करने के लिए कोई भी तरीका अपनाना, (2) मादक पदार्थ की मात्रा बढ़ाते जाना, (3) मानसिक एवं शारीरिक अधीनता।

    इन मादक पदार्थों को हम मुख्यत: निम्न प्रकारों में बांट सकते हैं:

    नारकोटिक्स : बेहोश करने वाली निद्राकारी औषधि -जैसे अफीम, हेरोइन आदि।
    डिप्रैसेन्ट्स : चंचल कराने वाली औषधि-जैसे मदिरा।
    स्टीमुलेन्ट्स : उत्तेजक-प्रोत्साहक औषधि-जैसे कोकीन।
    हाल्युसिनोजेन्स : मतिभ्रम, इन्द्रजाल पैदा करने वाली औषधि-जैसे धतूरा आदि।
    कैनाबिस : कल्पना लोक में पहुंचाने वाली औषधियां-जैसे चरस, गांजा आदि।

    किसी भी नशे के रोगी का इलाज प्रारम्भ करने से पूर्व निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक है -शराब, सिगरेट अथवा मादक पदार्थ के सेवन की आदत यदि रोगी के पिता अथवा परिवार के किसी सदस्य में रही हो, जिसकी वजह से रोगी को स्वयं से ही उनकी देखा-देखी नशा करने की आदत पड़ गई हो, पारिवारिक परिस्थितियां जैसे तनाव, व्यवसाय से असंतुष्ट, अशिक्षा अथवा प्रेम, जलन आदि की वजह से नशे की लत का शिकार हुआ हो। बुरे लोगों की संगति में रहना, घर-परिवार-समाज से बिलकुल कट जाने की भावना भी व्यक्ति को नशे के शिकंजे में कस सकती है।

    नशा करने का कारण

    बेरोजगारी, रोजगारपरक व चरित्र निर्माण करने वाली शिक्षा की कमी, अधिक जेब खर्च मिलना, कुछ नया करने की इक्छा, अकेलापन, आर्थिक तंगी, घरेलु कलह, गलत संगति, जागरुकता का अभाव आदि।

    चिकित्सा का प्रारूप

    नशे के रोगियों का इलाज करने के लिए बहुआयामी प्रारूप की आवश्यकता होती है। इसमें मानसिक,शारीरिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक पहलुओं पर गौर किया जाता है। प्रथम भाग में, मरीज की दवाओं द्वारा, व्याख्यानों द्वारा, शिक्षाप्रद सामग्री द्वारा एवं वार्तालाप द्वारा नशे की लत छुड़ाने का प्रयास करते हैं। दूसरे भाग में, मरीज की पूर्वस्थिति में (रोग से मुक्त की अवस्था) पहुंचाने की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है। इस अवस्था में रोगी डाक्टर, नर्स इत्यादि के साथ दैनिक प्रक्रियाएं प्रारम्भ करता है।

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  • टीनिया ,दाद का होम्योपैथी में उपचार

    टीनिया वर्सिकोलर , त्वचा पर फफूंद द्वारा उत्पन्न संक्रमण है, जो गर्दन, छाती, पीठ और भुजाओं पर निशानों द्वारा होता है। आमतौर पर त्वचा पर रहता है, हालाँकि, कुछ लोगों में, इस सूक्ष्मजीवी की त्वचा पर वृद्धि की संभावना, अन्य लोगों से अधिक होती है, दिखाई देने वाली त्वचा के आस-पास त्वचा पर लाल रंग का गोलाकार निशान। खुजली युक्त, लाल, उभरे हुए पपड़ीदार धब्बे जो फफोले बनकर बह सकते हैं, और उनके महसूस किये जा सकने वाले तीखे किनारे होते हैं। बालों का संक्रमण बाल रहित हिस्सों की उत्पत्ति कर सकता है। नाखूनों का संक्रमण उन्हें रंगहीन, मोटा और छोटे टुकड़ों में गिरने वाला तक बना सकता है। कारण यह विभिन्न प्रजातियों की फफूंद , से होने वाला परजीवी संक्रमण है। ये फफूंद गर्म और नम क्षेत्रों में होता है और केराटिन के आहार पर जीवित रहता है जो कि त्वचा की बाहरी सतह, नाखूनों और बालों पर पाया जाने वाला पदार्थ है। यह खेल की वस्तुओं, तौलिये और कपड़ों को बाँटकर उपयोग करने से फैलता है ,लेने योग्य आहार आहार में कच्ची सब्जियाँ और फल, साबुत अनाज जैसे ब्रोकोली, हरी फलियाँ, हरी पत्तेदार सब्जियाँ शामिल करें। कच्चे कद्दू के बीज, शक्करकंद, प्याज, खट्टे फल आदि टीनिया वर्सीकोलर के उपचार हेतु बढ़िया हैं। साबुत अनाजों के विभिन्न प्रकार जैसे चावल, पास्ता, ओटमील आदि बढ़िया विकल्प होते हैं। प्रतिदिन लहसुन की दो कच्ची कलियाँ लें क्योंकि लहसुन में अति उत्तम फफूंदरोधी गुण होते हैं। दही प्रतिदिन लिया जाना चाहिए क्योंकि यह शरीर पर उपस्थित बैक्टीरिया और फफूंद के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में सहायक होता है। जैतून और वनस्पति तेल का प्रयोग करें। इनसे परहेज करें कॉफ़ी चॉकलेट शक्कर फल डेरी उत्पाद खासकर पनीर और दही। खमीरयुक्त ब्रेड खमीर उठाई हुई कोई भी वस्तु जैसे वाइन।।होम्योपेथिक दवाओं से दाद हमेशा के लिए ठीक हो जाता है। होम्योपैथी में रोगी के शारीरिक और मानसिक लक्षण के अनुसार दवा दे कर रोग को ठीक किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर हेमंत श्रीवास्तव से संपर्क करें!

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  • गर्भाशय या बच्चेदानी (यूटरस) में गांठ में होमयोपैथ उपयोगी:-डा. हेमंत श्रीवास्तव

    गर्भाशय या बच्चेदानी (यूटरस) में गांठ होने पर बड़े चीरे का ऑपरेशन कर इसे निकालना पड़ता था, लेकिन होमयोपैथ से अब ऐसी गांठों को कहीं ज्यादा अच्छी तरह से ठीक किया जा सकता है। महिलाओं में गर्भाशय में गांठ का होना एक जटिल समस्या है। इन गांठों को फाइब्राइड या रसौली भी कहा जाता है। आंकड़ों के अनुसार एशिया की महिलाओं में यह समस्या सर्वाधिक पाई जाती है, लेकिन इनके कारण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। यह गांठ (फाइब्राइड) गर्भाशय में जिस जगह पर होती है, उसी के अनुसार इसके लक्षण होते हैं। लक्षण - अनियमित माहवारी और दर्द होना। - गर्भधारण न कर पाना। - बार-बार गर्भपात होना। - अत्यधिक रक्तस्राव होने से शरीर में खून की कमी होना। प्रारंभिक अवस्था में दवाओं द्वारा फाइब्राइड के लक्षणों व जटिलताओं को कम किया जा सकता है, होमियोपैथी दवा द्वारा इसका पूर्ण इलाज संभव है। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर हेमंत से परामर्श लें !

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  • शराब के लत को होम्योपैथी से दूर करें

    किसी मादक पदार्थ का नियतकालीन एवं दीर्घस्थायी सेवन जो कि किसी व्यक्ति विशेष अथवा समाज के लिए घातक हो, अवरोधक हो, उसे ही नशाखोरी कहना समीचीन है। बुरे लोगों की संगति में रहना, घर-परिवार-समाज से बिलकुल कट जाने की भावना भी व्यक्ति को नशे के शिकंजे में कस सकती है। नशा छुड़ाने की प्रक्रिया में रोगी को मादक पदार्थ प्राप्त नहीं होने से भूख लगती रहती है , हर वक्त सोता रहता है, पसीना बहुत आता है, हाथ-पैरों में ऐंठन होने लगती है ,कमजोरी, चिड़चिड़ाहट, बेचैनी, ऐंठन एवं मतिभ्रम पहले कुछ दिन महसूस होता है। मरीज ‘खूंखार’ हो जाता है, जम्हाई आना, नाक से पानी बहना, पसीना आना, आंखों से पानी आना, नींद न आना प्रमुख लक्षण हैं। पुतली का फैल जाना, ऐंठन अन्य लक्षण हैं। मरीज पीठ और पेट में दर्द की शिकायत करता है और सर्दी-गर्मी के झटके महसूस होते हैं। कुछ समय के लिए बेचैनी, उल्टी-दस्त आदि के लक्षण दिखाई देते हैं। शरीर का तापमान, सांस एवं पसीना बढ़ जाते हैं, किंतु 10 -15 दिन के भीतर लक्षण धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं। नींद न आना, बेचैनी, कमजोरी कुछ समय बनी रह सकती है। होमियोपैथिक दवाओं से मात्र 15 से 20 दिनों के अन्दर ही सारी परेशानियों पर काबू पा लिया जाता है। औषधियों का सेवन 30 शक्ति से शुरू करें। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर हेमंत श्रीवास्तव से संपर्क करें!

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  • Homeopathy

    Homeopathy, or homeopathic medicine, is a holistic system of treatment that originated in the late eighteenth century. The name homeopathy is derived from two Greek words that mean "like disease." The system is based on the idea that substances that produce symptoms of sickness in healthy people will have a curative effect when given in very dilute quantities to sick people who exhibit those same symptoms. Homeopathic remedies are believed to stimulate the body's own healing processes.It is recognised by the World Health Organisation as the second largest therapeutic system in use in the world. While it is most popular in India and South America, over thirty million people in Europe, and millions of others around the world, also benefit from its use.

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  • Pimples

    A pimple, zit or spot is a kind of comedo and one of the many results of excess oil getting trapped in the pores. Some of the varieties are pustules or papules. Pimples can be treated by Homeopathy medications prescribed by a physician, or purchased at a pharmacy with a wide variety of treatments.

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  • Anxiety & Depression Homeopathy Treatment

    Five to ten per cent of patients visit­ing their GP will be suffering from “clinical” or “major” depression. This means that as a GP, two to three of the patients I see in a normal working day will be experiencing debilitating and disabling symptoms of feeling down, depressed or hopeless and will have little interest or pleasure in doing things. Too many people still think that depres­sion is “all in the mind” and there is a great deal of guilt felt by sufferers that they cannot just snap out of itHomeopathy may have a part to play as an additional or complemen­tary treatment but NOT as a stand alone therapy in these situations..

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  • Gallbladder stones treatment in homeopathy

    an effective gallbladder stones treatment in advanced homeopathy means: gall bladder stones become dissolved and removed without operation or surgery immediate pain relief is addressed incidents of colic are very less

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  • DEPRESSION & HOMOEOPATHY

    While we all feel sad, moody or low from time to time, some people experience these feelings intensely, for long periods of time (weeks, months or even years) and sometimes without any apparent reason. Depression is more than just a low mood – it's a serious condition that affects your physical and mental health Details of Homeopathic Remedies Used in the Treatment of Depression As you can see, there are many homeopathic remedies for depression. The challenge is to find the homeopathic remedy that best fits the personality and symptoms of the person. You will find that this can be fairly difficult, especially when some of the person’s symptoms overlap.

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  • OBESITY & HOMOEOPTHY

    Homeopathy is the safest way to cure obesity without bearing much pain. Here are some remedies which you can use easily. Find more below. Homeopathy is a time tested, proven method to cure obesity. In fact, it offers treatments for several aspects for obesity.
    Homeopathy not only helps you in losing weight but it improves your metabolic system, digestive system and elementary system.
    But the medicines need to be individually prescribed, based on your own unique pattern of symptoms. Constitutional treatment is most appropriate, but some of the following remedies might be useful .Below are some simple remedies which you can take but you are always suggested to consult a specialist. Antimcrud, calcareacarb, graphitis, Phytolacca.

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