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Safe and Gentle Treatment

Homoeopathy is safe for all age group

World Record Holder

world record in largest urteric stone remove without surgery.

  • Jaundice

    Jaundice is a yellowish discoloration of the skin, mucous membranes and of the white of the eyes caused by elevated levels of the chemical bilirubin in the blood (hyperbilirubinemia). The term jaundice is derived from the French word jaune, which means yellow. Jaundice is not a disease per se, but
  • Psoriasis

    Unpredictable and irritating, psoriasis is one of the most baffling and persistent of skin disorders. It's characterized by skin cells that multiply up to 10 times faster than normal. As underlying cells reach the skin's surface and die, their sheer volume causes raised, red plaques covered with white scales. Psoriasis
  • Kidney Stone

    As the kidneys filter waste from the blood, they create urine. Sometimes, salts and other minerals in urine stick together to form small kidney stones. These range from the size of a sugar crystal to a ping pong ball, but they are rarely noticed unless they cause a blockage. They
  • Appointment For Dr. Hemant Srivastav

    Please use 9984788899 for further consultation related information.

Latest News

  • आप माइग्रेनसे परेशान हैं? तो इसको जरूर देखें !

    माइग्रेन आपका पुराना सिर दर्द भी हो सकता है और इसे बोल चाल की भाषा में आधासीसी और अधकपाटी भी हम कह देते है और माइग्रेन होने के पीछे एक नहीं कई तरह के कारण हो सकते है जिसमे कुछ मुख्य है – अच्छी नींद नहीं लेना , जरुरत से अधिक नकारात्मक तनाव , हारमोन्स का संतुलित नहीं होना आदि मुख्य है जिसमे तनाव को तो आप तनाव के जरिये कम कर सकते है और नींद को बेहतर करने के साथ साथ आप अपने जीवन शैली को भी बेहतर कर सकते है इसके साथ ही अगर आपको किसी खास तरह की कोई एलर्जी है ,अनीमिया यानि खून की कमी है तो भी आपको माइग्रेन की शिकायत हो सकती है और साथ ही यह जानना भी जरुरी है कि अगर पूरे आंकड़ो पर गौर करें तो पुरुषो की अपेक्षा महिलाओं के लिए इसकी होने के ज्यादा सम्भावना है और दुनिया भर में लगभग पांच प्रतिशत पुरुष और पच्चीस फीसदी महिलाएं माइग्रेन से परेशान हैं! आधे सिर में दर्द होता है जो आपके पूरे सिर में भी हो सकता है और धीमा धीमा लगातार बना रहता है | सिर दर्द के साथ साथ चक्कर भी आते है | महिलाओं में अकसर कमजोरी की और अधिक तनाव की वजह से ऐसा होता है | हाथो और पैरो में सूनापन होना | खून के संचार में समस्या के चलते भी इसका सामना करना पड़ता है | रौशनी और तेज आवाज से परेशानी होना | तेज सिर दर्द के साथ साथ उलटी की समस्या होना | गैस होना जो कि कब्ज की वजह से होती है | ये कुछ मुख्य लछण और ऐसे में आपको अपने ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता के कम होने की समस्या का भी सामना करना पड़ता है | सफल और पूर्णतया समाधान के लिए आज ही संपर्क करें प्रसिद्ध होम्योपैथ चिकित्सक डा़ हेमंत श्रीवास्तव से

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  • किडनी या गुर्दे की बीमारी

    किडनी या गुर्दे की बीमारी को ‘साइलेन्ट किलर’ भी कहा जाता है। क्योंकि प्रथम अवस्था में कभी भी इसका पता नहीं चलता है।किडनी शरीर का एक ऐसा अंग होता है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को छानकर मूत्र के रूप में निकालने में मदद करता है। इसमें खराबी मतलब पूरे शरीर के कार्य में बाधा उत्पन्न होना,  इसलिए किडनी को स्वस्थ रखना बहुत ज़रूरी होता है। लेकिन आज के आधुनिक युग की जीवनशैली के कारण किडनी की बीमारी होने का खतरा बढ़ गया है। इससे बचने के लिए सबसे पहले ज़रूरी है किडनी के शुरूआती लक्षणों के बारे में जानना- मूत्र की मात्रा या तो बढ़ जाती है या कम हो जाती हैमूत्र का रंग गाढ़ा हो जाता हैबार-बार मूत्र होने का एहसास होता है मगर करने पर नहीं होता हैरात को मूत्र की मात्रा या तो कम हो जाती है या कममूत्र का त्याग करने के वक्त दर्द होनामूत्र में रक्त का आनाझाग (foam) जैसा मूत्रपैर, हाथ और चेहरे में सूजन  आदि । यह तो किडनी के बीमारी के आम लक्षण हैं जिसका थोड़ा भी एहसास होने पर तुरन्त इसकी जाँच करवायें। और चिकित्सक के सलाह के अनुसार इलाज करना शुरू करें नहीं तो समय के साथ स्थिति खराब होती जाती है। डॉ. हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि किडनी की बीमारी का इलाज करने के लिए होम्योपैथी में दवाओं का भंडार है। बस जरूरत है इसके नियमित रूप से सेवन करने की आवश्यकता है! होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में गुर्दे के लिए कई प्रभावशाली दवाएं उपलब्ध  हैं जो गुर्दे की हो रही क्षति को स्थिर कर सकती हैं तथा  गुर्दे की कार्य क्षमता भी बढ़ा  सकती हैं  जबकि अन्य चिकित्सा पद्धतियों में रोगी को जो भी दवाएं दी जाती है उसमे कुछ न कुछ विषाक्तता होती है जिसे गुर्दे को ही छानकर शरीर से बाहर निकलना होता है परन्तु स्वम गुर्दे के रोग ग्रस्त होने पर यह उसपर एक अवांछित बोझ है !     होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में गुर्दे के इलाज  के लिए दी जाने वाली औषधियों में दवा की मात्रा अत्याधिक सूक्ष्म होती है अतः गुर्दे को कोई क्षति नहीं पहुचती ! किसी होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श कर चिकित्सा ली जाये तथा चिकित्सक के निर्देशानुसार खान-पान में परहेज किया जाये तो तो इस रोग में आशातीत परिणाम मिल सकता है !रोगी डायलिसिस एवं गुर्दा प्रत्यारोपण जैसी पीड़ादायक स्थिति से बच सकता है ! सफल और पूर्णतया समाधान के लिए आज ही संपर्क करें प्रसिद्ध होम्योपैथ चिकित्सक डा़ हेमंत श्रीवास्तव से!

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